Advertisement

Child Labour: बच्चों के लिए इन खतरनाक व्यवसायों में रोजगार प्रतिबंधित है, जानिए क्या हैं शर्तें

Written by lakshmi sharma |Published : March 28, 2023 8:27 AM IST

Child Labour: हमारे देश में, बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के कार्य में नियोजित करना एक संज्ञेय अपराध है. इस अधिनियम के अनुसार ऐसा करने पर दोषी को अधिकतम 2 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है. इसके अलावा इस अधिनियम के तहत 14 साल से ऊपर के बच्चों के लिए कुछ निर्धारित शर्तों के आधार पर कुछ खास नौकरियों में प्रावधान किया जा सकता है.

Advertisement
Advertisement

लेटेस्‍ट आर्टिकल्‍स

AMU Student election

AMU में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग, विश्वविद्यालय प्रशासन से नाराजगी जाहिर करते हुए Allahabad HC ने दिया ये निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इस अदालत द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में विश्वविद्यालय की ओर से दिए गए जवाब में संकेत दिया गया है कि संस्थान उचित समय पर चुनाव कराएगा.  हालांकि, इस जवाब में उन मुद्दों के बारे में नहीं बताया गया जो इस याचिका में उठाए गए हैं.

Chief Justice Manmohan

दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनमोहन बनेंगे सुप्रीम कोर्ट जज, कॉलेजियम की सिफारिश से केन्द्र ने जताई सहमति

जस्टिस मनमोहन के नाम की सिफारिश करने वाले उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम के बयान में कहा गया था कि जस्टिस मनमोहन अखिल भारतीय स्तर पर उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वरिष्ठता क्रम में दूसरे स्थान पर हैं.

BNSS Section 8

Documents किसे कहते हैं? BNSS के तहत किन-किन कागजातों को कानूनन वैध माना जाएगा

बीएनएसएस की धारा 8, डॉक्यूमेंट्स को किसी पदार्थ पर अक्षरों, आंकड़ों या चिह्नों के माध्यम से व्यक्त या वर्णित किसी भी मामले के रूप में परिभाषित करती है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं.

Appointment of Chief Election Commissioner

CJI को चुनाव आयुक्त की चयन समिति से बाहर रखने का मामला, चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने खुद को सुनवाई से किया अलग

पिछले साल 2 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को पारदर्शी बनाने के लिए आदेश दिया था कि इन पदों पर नियुक्ति चीफ जस्टिस,पीएम और विपक्ष के नेता वाली कमेटी द्वारा की जाएं, लेकिन सरकार ने क़ानून लाकर इस नियुक्ति में चीफ जस्टिस की भूमिका को खत्म कर दिया था. 

Sheltor Homes in Delhi

क्या बेघरों के लिए दिल्ली में पर्याप्त आश्रय गृह हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सुधार बोर्ड से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि डीयूएसआईबी से आश्रय गृहों में कितने लोगों को रखा जा सकता है, इसकी संख्या तथा ऐसी सुविधाओं की आवश्यकता वाले लोगों की अनुमानित संख्या बताने को कहा

Hindu Saint Chinmay Krishna

वकील की अनुपस्थिति से नहीं हो सकी सुनवाई, बंग्लादेश में गिरफ्तार हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका महीने भर के लिए स्थगित

चटगांव मेट्रोपॉलिटन सत्र के न्यायाधीश मोहम्मद सैफुल इस्लाम की अदालत में सुनवाई होनी थी लेकिन चिन्मय की ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ.