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Divorce Case: पति के आर्थिक हालात पर लगातार ताने मारना मानसिक क्रूरता, Delhi High Court ने माना इसे तालाक का आधार

Delhi High Court

अपने पति के आर्थिक हालात पर लगातार ताने देने को तलाक का आधार मानते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पत्नी की याचिका खारिज कर दिया. जानें क्या था पूरा मामला...

Written by My Lord Team |Published : February 5, 2024 2:04 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने हाल ही में तलाक से जुड़े मामलें की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर पत्नी लगातार अपने पति की आर्थिक स्थिति (financial Conditions) पर तानें (Taunts) देती है, तो ये तलाक (Divorce) के बड़ी वजह बन सकती है. पत्नी द्वारा लगातार अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए अपने पति पर दबाव बनाना एक प्रकार की मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty)है. यह कहकर दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया.

पत्नी समझें पति की आर्थिक स्थिति: Delhi High Court

जस्टिस सुरेश कुमार कैत और नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने इस मामले को सुना. बेंच ने कहा कि पत्नी को अपने पति के आर्थिक सीमाओं की एहसास दिलाने से बचना चाहिए. मामले में कोर्ट ने आगे कहा कि एक पत्नी को अपने पति की आर्थिक स्थिति से अवगत होना चाहिए. साथ ही पति से उन मांगों से बचना चाहिए, जो उसकी आर्थिक सीमाओं से बाहर है. क्योंकि पत्नी की मांगों को पूरा न कर पाना पति के ऊपर एक मानसिक दबाव लाता है, जो शादीशुदा जिंदगी की शांति बिगाड़ने के लिए पर्याप्त है. हर किसी को अपनी जरूरत और इच्छाओं के बीच की गहराई को समझना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि बार-बार होनेवाली नोकझोंक और लड़ाई की वजह से किसी भी व्यक्ति के मन में स्ट्रेस उत्पन्न होता है, जो उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है.

क्या है पूरा मामला?

पति ने तलाक की मांग करते हुए फैमिली कोर्ट में मामला दायर किया. पति ने अपने आरोप में कहा था कि पत्नी ने उसे माता-पिता से दूर एक अलग घर में रहने के लिए बाध्य किया. साथ ही उसे अपने पैरेंटस से 8000 रूपये उधार लेने पर ताने दिए. आरोप में आगे बताया कि पत्नी ने उस पर दूसरे औरत के साथ रहने के झूठे आरोप लगाए. साथ ही उसे हाई सोशायटी लाइफ(High Society Life) जिंदगी का शौक है, जो उसकी आर्थिक स्थिति में संभव नहीं है. फैमिली कोर्ट ने सबूतों को ध्यान में रखते हुए तलाक की मंजूरी दे दी.

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Delhi High Court ने रद्द की याचिका

फैमिली कोर्ट ने दोनों के बीच स्थिति सुधारने के लिए साल भर का समय दिया था, जिसके बाद भी दोनों के बीच की स्थिति में बदलाव नहीं दिखें. बाद में फैमिली कोर्ट ने तलाक की मंजूरी दे दी. फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की. पत्नी ने अपनी याचिका में कहा कि उस पर लगाए सारे आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत है. वह अपने पति के प्रति समर्पित है और अपने वैवाहिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही है.पत्नी की इस याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज किया है.

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