कर्नाटक हाई कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन अधिनियम-2025 के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए शनिवार को केंद्र से जवाब तलब किया. याचिकाकर्ता ने अधिनियम को चुनौती देते हुए दलील दी है कि इससे रातोंरात हजारों लोगों की आजीविका खत्म होने का खतरा है.
जस्टिस बी एम श्याम प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया. इसी के साथ याचिकाकर्ताओं को अधिनियम के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाने की उनकी याचिका के समर्थन में विस्तृत दलीलें भी रखने की अनुमति दे दी. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है, लेकिन इसे अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है. उन्होंने दलील दी कि तत्काल कार्यान्वयन से उद्योग को भारी झटका लगेगा. वादी पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि अगर यह उद्योग रातोंरात बंद हो गया, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे. सरकार को या तो हमारी बात सुने जाने तक अधिसूचना रोक देनी चाहिए, या कम से कम एक सप्ताह पहले सूचना देनी चाहिए, ताकि हम अदालत का दरवाजा खटखटा सकें.
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह पहली बार है जब किसी अदालत द्वारा इस तरह के कानून की वैधता की जांच की जा रही है, क्योंकि इसका सीमा पार प्रभाव है. उन्होंने कहा कि एक बार संसद कोई कानून पारित कर देती है और उसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिल जाती है, तो अधिसूचना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बन जाती है. मेहता ने दलील दिया कि इस स्तर पर अदालतें हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। केवल इसलिए कि कोई व्यक्ति व्यथित महसूस करता है, इसका अभिप्राय यह नहीं है कि सरकार को कानून को अधिसूचित करने से पहले अग्रिम सूचना देना आवश्यक है. कर्नाटक हाई कोर्ट ने सवाल किया कि क्या केंद्र सरकार कानून को तुरंत अधिसूचित करने का इरादा रखती है? इसके जवाब में मेहता ने कहा कि वह सरकार से निर्देश लेकर सूचित करेंगे. इसके बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी और केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह अंतरिम राहत का अनुरोध करने वाली याचिकाकर्ता की दलीलों के साथ अपना जवाब भी पेश करे.