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हेमंत सोरेन को झारखंड HC से मिली जमानत, लेकिन ऑर्डर कॉपी ED की मुश्किलें बढ़ा देंगी 

झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को जमानत दी है. वहीं ऑर्डर कॉपी में अदालत ने ED की दलीलों को मानने से इंकार कर दिया है.

झारखंड हाईकोर्ट (सौजन्य से: ANI)

Written by Satyam Kumar |Updated : June 28, 2024 6:28 PM IST

Hemant Soren Regular Bail: 13 जून के दिन झारखंड हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था. पहले अदालत ने निर्णय सुनाया जिसमें झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को जमानत दी थी. अब झारखंड हाईकोर्ट के फैसले की ऑर्डर कॉपी आई है. ऑर्डर कॉपी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की नींदे उड़ाने के लिए काफी है. झारखंड हाईकोर्ट ने ED की दलीलों को अस्पष्ट बताया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि ED के पास आरोप को पुष्ट करने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है.

हालांकि, अब देखना दिलचस्प रहेगा कि ED आगे क्या करती है? हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देती है या नहीं? आइये जानते हैं...

झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय (Justice Rongon Mukhopadhyay) ने की एकल बेंच ने हेमंत सोरेन को जमानत दी है. अब अदालत की ऑर्डर कॉपी सामने आई है. अदालत ने ED की दलीलों को मानने से इंकार किया है.

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा, 

"ED का यह दावा कि उसकी कार्रवाई ने जमीनी कागजों में जालसाजी और हेराफेरी करके भूमि के अवैध अधिग्रहण को रोक दिया था. यह एक अस्पष्ट बयान प्रतीत होता है कि भूमि पहले से ही अधिग्रहित थी और याचिकाकर्ता के पास उस पर कब्जा था, जैसा कि पीएमएलए, 2002 की धारा 50 के तहत दर्ज कुछ बयानों के अनुसार है."

हेमंत सोरेन के बयानों को अदालत का हवाला देते हुए अदालत ने आगे बताया कि पीएमएल के सेक्शन 50 (PMLA Section 50)  की उपधारा -4 के अनुसार दर्ज बयानों को न्यायिक कार्यवाही में रिकार्ड किया माना जाएगा.

अदालत ने कहा, 

" परिस्थितियों के अनुसार, पीएमएलए, 2002 की धारा 45 के अनुसार इस शर्त को पूरा करता है कि याचिकाकर्ता कथित अपराध का दोषी नहीं है... मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता द्वारा समान प्रकृति का अपराध करने की कोई संभावना नहीं दिखाई पड़ती है."

अदालत ने टाइमलाइन पर ध्यान देते हुए बताया कि कथित आरोपी के खिलाफ कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई, जबकि वे उस समय सत्ता में भी नहीं थे.

अदालत ने ये भी कहा, 

 "याचिकाकर्ता, खुद को शांति नगर, बारागैन, रांची में 8.86 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और कब्जे के साथ-साथ “अपराध की आय” से जुड़े मामले में शामिल नहीं बताता है. किसी भी रजिस्टर/राजस्व रिकॉर्ड में उक्त भूमि के अधिग्रहण और कब्जे में याचिकाकर्ता की प्रत्यक्ष भागीदारी का कोई निशान नहीं है."

फलस्वरूप, झारखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को 50,000 बेल बॉन्ड और दो जमानतदार पेश करने की शर्तों पर रिहा करने की इजाजत दे दी है