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मनी लॉन्ड्रिंग क्या है? जानिए सजा के प्रावधान

मनी लॉन्ड्रिंग एक जघन्य अपराध है जो न केवल देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करता है, बल्कि आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, आतंकवाद आदि जैसे अन्य गंभीर अपराधों को भी बढ़ावा देता है.

Written by My Lord Team |Published : February 13, 2023 1:17 PM IST

नई दिल्ली: कुछ अपराध प्रथम दृष्टया समझ से परे होते है लेकिन गहराई से छानबीन होने पर उनकी असलियत सामने आती है. मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) एक ऐसा ही अपराध है. अक्सर मीडिया में ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं जिनमें किसी कारोबारी, नेता या फिर किसी व्यक्ति के घर या उसके किसी ठिकाने से बेहिसाब पैसे या संपत्ति बरामद की गई है जबकि उसकी कमाई बहुत कम होती है.

कुछ लोग अपनी आय, उसका जरिया छिपाने, और टैक्स बचाने आदि के लिए गैर-कानूनी रास्ते जैसे मनी लॉन्ड्रिंग का प्रयोग करते हैं.

मनी लॉन्ड्रिंग क्या है

मनी लॉन्ड्रिंग आपराधिक या गैरकानूनी गतिविधि, जैसे मादक पदार्थों की तस्करी या आतंकवादी फंडिंग आदि द्वारा उत्पन्न बड़ी मात्रा में धन बनाने की अवैध प्रक्रिया है, जिसे ऐसा दिखाया जाता है कि यह एक वैध स्रोत से आया है. मनी लॉन्ड्रिंग एक गंभीर वित्तीय अपराध है. काले धन की बहुतायत कई अवैध प्रथाओं की उत्पत्ति की ओर ले जाती है, और मनी लॉन्ड्रिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जो इस तरह के धन के स्रोत को छिपाने के लिए होती है.

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सरल भाषा में, यह एक अवैध कार्य है जो काले धन को सफेद धन में परिवर्तित करता है. ऐसी प्रथाओं को रोकने और उन पर अंकुश लगाने के लिए एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (Anti-money laundering) उपायों को महत्व मिला है.

अपराधी अपने अवैध धन को वैध बनाने के लिए रचनात्मक तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग के तरीकों को विकसित कर रहे हैं. स्मर्फिंग, इलेक्ट्रॉनिक धन, क्रिप्टोकरेंसी, केसिनो आदि जैसे माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग सबसे अधिक होती है.

मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया

मनी लॉन्ड्रिंग एक तीन चरणों वाली प्रक्रिया है- प्लेसमेंट (Placement), लेयरिंग (Layering) और इंटीग्रेशन (Integration).

पहले चरण में, मनी लॉन्ड्रर अपराध के पैसे को वैध वित्तीय प्रणाली में इंजेक्ट करता है. यह अक्सर किसी गुमनाम निगम या पेशेवर बिचौलिए के पास पंजीकृत बैंक खाते में धन जमा करने की प्रक्रिया है. इसलिए इसे प्लेसमेंट कहते हैं.

दूसरे चरण को लेयरिंग कहा जाता है. इस चरण में पैसे को वित्तीय प्रणाली में अच्छी तरह से स्थानांतरित किया जाता है. प्लेसमेंट द्वारा लगाए गए धन को एक या अन्य देशों के विभिन्न खातों में फैलाया जाता है, जहां धन-शोधन विरोधी कानून इतने कठोर नहीं हैं, जिससे स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो.

तीसरे चरण में, अच्छी तरह से स्तरित काला धन विभिन्न तरीकों से जैसे ऋण, लाभांश, निवेश आदि के माध्यम से फिर से वित्तीय प्रणाली में प्रवेश करता है, और अपराध के साथ धन के मूल संबंध को मिटा देता है और उस धन का उपयोग स्वच्छ स्रोतों से आए धन की तरह करता है. इस प्रकार, अवैध पैसा वैध संपत्ति में परिवर्तित हो जाता है.

इस प्रकार मनी लॉन्ड्रिंग कानून को पराजित करता है.

मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम

हमारे देश में जहां धन का असमान वितरण पहले से ही इसके विकास में बाधक है, धन शोधन की बढ़ती आपराधिक गतिविधियां इसमें चार चांद लगा देती है. अत: मनी लॉन्ड्रिंग हमारे पूरे समाज के लिए अभिशाप है.

यह अमीरों को और अमीर बनाता है और इस तरह समाज में आर्थिक व सामाजिक असंतुलन पैदा होता है. इन कारणों से, सरकार के लिए धन शोधन से संबंधित अलग नियम और विनियम बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है.

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002, (PMLA), धन शोधन निवारण (रिकॉर्ड का रखरखाव) नियम, 2005, विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974, बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988, IPC, 1860 और CrPC, 1973 आदि में धन शोधन के अपराध से संबंधित कुछ प्रावधान हैं. वैश्विक स्तर पर धन शोधन की रोकथाम के लिए स्थापित एक अंतर-सरकारी निकाय वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (Financial Action Task Force) मौजूद है, जिसका भारत एक हस्ताक्षरकर्ता है.

धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002: धन शोधन की रोकथाम (Prevention of Money Laundering) के लिए लोकसभा में वर्ष 1998 में विधेयक पेश किया गया था, जो अंततः वर्ष 2002 में पारित हुआ. इस अधिनियम में वर्ष 2005, 2009 और 2012 में संशोधन किए गए हैं. यह अधिनियम धन शोधन से संबंधित अपराधों के परीक्षण के लिए विशेष अदालतों की स्थापना भी करता है. PMLA धारा 43 के तहत धन शोधन के अपराधों की सुनवाई के लिए कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अदालतों की स्थापना का प्रावधान करता है, धारा 6 के तहत धन शोधन से प्राप्त किसी भी संपत्ति की कुर्की और जब्ती से संबंधित कार्यवाही करने के लिए न्यायिक प्राधिकरण, धारा 49 के तहत निदेशक या किसी अन्य प्राधिकरण और धारा 25 के तहत एक अपीलीय न्यायाधिकरण की नियुक्ति का प्रावधान करता है.

धन शोधन निवारण (रिकॉर्ड का रखरखाव) नियम, 2005: भारतीय रिजर्व बैंक के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसका उद्देश्य काले धन को सफेद करने से रोकना है. इस अधिनियम को लागू करने का उद्देश्य लेनदेन की प्रकृति और मूल्य के रिकॉर्ड के रखरखाव, रखरखाव की प्रक्रिया, तरीके और जानकारी को प्रस्तुत करने के लिए समय और बैंकिंग कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बिचौलियों के ग्राहकों की पहचान के रिकॉर्ड का सत्यापन प्रदान करना है.

वित्तीय कार्रवाई टास्क फोर्स (Financial Action Task Force): FATF एक निकाय है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन शोधन और आतंकवादी वित्तपोषण (Financing) निगरानी के रूप में कार्य करता है. यह एक अंतर-सरकारी निकाय है जो अवैध आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए नियम निर्धारित करता है. FATF के सदस्य 200 देश है जो बदले में धन शोधन और आतंकवादी वित्तपोषण के क्षेत्र में राष्ट्रीय कानून बनाते हैं. इसका गठन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ने के लिए पेरिस में आयोजित G-7 समिट में सात देशों के समूह द्वारा 1989 में एक अंतरराष्ट्रीय समिति के रूप में किया गया था.

विदेशी मुद्रा संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974: इस अधिनियम को वर्ष 1974 में राष्ट्र के भीतर विदेशी मुद्रा को बनाए रखने के प्रयास के रूप में पारित किया गया था. यह अधिनियम मुख्य रूप से निवारक (Preventive) निगरानी की विचार के साथ अधिनियमित किया गया था.

बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988: बेनामी लेनदेन, एक ऐसे लेनदेन को दर्शाता है जिसमें एक व्यक्ति संपत्ति को दूसरे को स्थानांतरित करता है और जहां पक्षों या एक पक्ष की पहचान छुपाई जाती है. धन शोधन में शामिल अपराधी अक्सर अपनी पहचान और संपत्ति की खरीद में निवेश किए गए धन के स्रोतों को छिपाने के लिए ऐसे बेनामी लेनदेन में शामिल हो जाते हैं. इस अधिनियम की धारा 3 स्पष्ट रूप से बेनामी लेनदेन को प्रतिबंधित करती है और उन्हें शून्य घोषित करती है.

भारतीय दंड संहिता, 1860 और दंड प्रक्रिया संहिता, 1973: दंड संहिता विभिन्न अपराधों के लिए सजा प्रदान करती है जिनका उल्लेख PMLA में भी किया गया है, और अपराधी, जब अदालत में पेश किए जाते हैं, तो CrPC के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हैं, जब तक कि वे PMLA की धारा 65 के तहत के प्रावधानों के साथ असंगत न हों.

प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate)

प्रवर्तन निदेशालय एक बहु अनुशासनिक संगठन है जो धन शोधन के अपराध और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन की जांच के लिए अनिवार्य है. ED को फेरा अधिनियम, 1973 और फेमा 1999, अधिनियम के तहत भारत सरकार की सभी तरह की वित्तीय जांच करने का अधिकार प्राप्त है. इसके अलावा सरकार ने ईडी को विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत उल्लंघन से निपटने की, विदेश में किसी भी संपत्ति पर कार्यवाही करके रोकथाम करने की, और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पाए गए लोगों के खिलाफ जब्ती, गिरफ्तारी और खोज करने की भी पूरी छूट प्रदान कर रखी है.

वित्तीय आसूचना इकाई - भारत (Financial Intelligence Unit ‑ India)

वित्तीय आसूचना इकाई - भारत, की स्थापना 2004 में केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी के रूप में भारत सरकार द्वारा की गई थी. यह संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी प्राप्त करने, प्रसंस्करण, विश्लेषण और प्रसार करने के उद्देश्य से कार्य करती है. यह धन शोधन और अन्य संबंधित अपराधों को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया, जांच और प्रवर्तन एजेंसियों के प्रयासों को मजबूत तथा समन्वित करने के लिए भी जिम्मेदार है.

मनी लॉन्ड्रिंग के लिए सजा के प्रावधान

PMLA की धारा 4 में मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को 3 साल के कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है. हालांकि, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 के तहत अपराधों से संबंधित मामलों में, व्यक्ति को कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा जो 7 साल के बजाय 10 साल तक बढ़ सकता है.

PMLA की धारा 5 के अनुसार निदेशक, संयुक्त निदेशक या उप निदेशक को 180 दिनों के लिए धन शोधन की संपत्ति को कुर्क करने का अधिकार है, बशर्ते कि उनके पास यह विश्वास करने का कारण हो कि व्यक्ति आपराधिक कार्यवाही के अधीन है.

PMLA की धारा 9 के तहत धन शोधन संबंधित संपत्ति की जब्ती के बाद, संपत्ति के सभी अधिकार और शीर्षक सरकार के होंगे.

मनी लॉन्ड्रिंग के प्रभाव

मनी लॉन्ड्रिंग एक जघन्य अपराध है जो न केवल देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करता है, बल्कि आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, आतंकवाद आदि जैसे अन्य गंभीर अपराधों को भी बढ़ावा देता है. यह अपराधियों के लिए अवैध गतिविधियों को अंजाम देने का मार्ग प्रशस्त करता है.

यह वित्तीय संस्थानों को नष्ट करने की भी प्रवृत्ति रखता है, जिन्हें अक्सर किसी देश की आर्थिक समृद्धि का स्तंभ माना जाता है. यह देश के विकास को खतरे में डालने की कीमत पर भ्रष्टाचार, अपराध और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए एक सुगम मार्ग की सुविधा प्रदान करता है.

धन शोधन एक वैश्विक समस्या है जिसे देशों के बीच सहयोग से रोकने की जरूरत है. और यह न केवल सरकार को धमकी देता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी नुकसान पहुंचाता है. इससे बैंकिंग प्रणाली के लिए भी खतरा पैदा होता है.