रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मामला, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आज (शुक्रवार को) पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने रामसेतु’ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के उनके अभ्यावेदन पर शीघ्रता से निर्णय लेने का सरकार को निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया है. रामसेतु तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी अपतटीय क्षेत्र स्थित पम्बन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र स्थित मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर की एक लंबी श्रृंखला है. सुब्रमण्यम स्वामी ने कोर्ट से मांग की है कि वो सरकार को निर्देश दे कि राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की उनकी मांग वाले ज्ञापन पर जल्द फैसला ले. अब सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि उन्होंने 27 जनवरी 2023 और 15 मई 2025 को सरकार को ज्ञापन भेजे थे लेकिन सरकार ने अभी तक अपने किसी फैसले से उन्हें अवगत नहीं कराया है, इसलिए उन्हे फिर से सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की तथा केंद्र को नोटिस जारी किया है. इससे पहले जनवरी 2023 में कोर्ट ने रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की अर्जी पर सुनवाई की थी. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर सरकार विचार कर रही है. तुषार मेहता ने सुझाव दिया था कि कोर्ट में सुनवाई के बजाए यह बेहतर होगा कि स्वामी सरकार को इसके लिए ज्ञापन दे. इसके मद्देनजर कोर्ट ने तब याचिका का निपटारा किया था.
तब सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2023 के अपने आदेश में कहा था कि सॉलिसिटर जनरल ने कहा है कि यह प्रक्रिया वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय में जारी है, लेकिन यदि याचिकाकर्ता चाहे तो वह दो सप्ताह की अवधि के भीतर अपनी इच्छानुसार कोई अतिरिक्त सामग्री या संचार भी प्रस्तुत कर सकता है. अदालत ने केंद्र से इस मुद्दे पर निर्णय लेने को कहा था और स्वामी को असंतुष्ट होने पर दोबारा न्यायालय आने की स्वतंत्रता दी थी तथा इस मुद्दे पर उनकी अंतरिम याचिका का निपटारा कर दिया था.