चार हफ्ते तक कोई गिरफ्तारी नहीं... असम में 3000 बीघा जमीन से जुड़े वीडियो बनाने के मामले में 'पत्रकार' को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत
असम पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की पत्रकार अभिसार शर्मा की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया है. सुप्रीम कोर्ट ने अभिसार को गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने को कहा. हालांकि, इस दरम्यान सुप्रीम कोर्ट ने अभिसार को गिरफ्तारी से चार हफ्ते के लिए संरक्षण ज़रूर दिया है, यानि अभी उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी. पत्रकार अभिसार शर्मा ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है. उनकी इस अर्जी पर कोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट इस अर्जी पर इस मामले को लेकर पहले से लंबित अर्जियों के साथ सुनवाई करेगा. असम पुलिस ने अभिसार शर्मा के खिलाफ FIR उनके एक वीडियो के लिए की गई है जिसमे उन्होने 3000 बीघा आदिवासी जमीन को एक निजी कंपनी को अलॉट करने का आरोप लगाते हुए राज्य सरकार की आलोचना की थी.
जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने असम में शर्मा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उन्हें गौहाटी उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा. बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 की वैधता को चुनौती देने वाली उनकी अर्जी पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह धारा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है.
पीठ ने कहा,
जहां तक प्राथमिकी को चुनौती देने की बात है, हम इस पर विचार करने के लिए तैयार नहीं हैं. हालांकि, हम याचिकाकर्ता (शर्मा) को चार सप्ताह की अवधि के लिए अंतरिम संरक्षण देने के लिए तैयार हैं ताकि वह हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकें.’’
शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि बीएनएस की धारा 152 एक सर्वव्यापी प्रावधान बन गई है, जिसे किसी के भी खिलाफ लागू किया जा सकता है. पीठ ने उनसे प्राथमिकी को हाई कोर्ट में चुनौती देने के लिए कहा. इस पर सिब्बल ने कहा कि शीर्ष अदालत पहले एक ऐसे ही लंबित मामले में हस्तक्षेप कर चुकी है. आगे पीठ ने कहा कि हम आपको संरक्षण देंगे, आप वहां (हाई कोर्ट) जाइए. आप हाई कोर्ट को क्यों नजरअंदाज कर रहे हैं? सिब्बल ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है. पीठ ने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर विचार भी कर ले तो भी एक और प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है.
बताते चलें कि वकील सुमीर सोढ़ी के जरिए दायर याचिका में कहा गया है कि शर्मा द्वारा अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो के खिलाफ एक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. वीडियो में उन्होंने एक निजी कंपनी को सीमेंट कारखाना स्थापित करने के लिए आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में 3,000 बीघा जमीन आवंटित करने पर सवाल उठाया है. याचिका में कहा गया है कि इस वर्ष 21 अगस्त को बीएनएस की धारा 152 सहित अन्य धाराओं में कथित अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई.