Advertisement

कलंक पीड़िता पर नहीं, अपराधी पर लगता है... पॉक्सो केस में दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केस रद्द करने से किया इंकार

दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की याचिका खारिज करते हुए कहा कि कलंक पीड़िता पर नहीं, बल्कि अपराधी पर लगना चाहिए. अदालत ने आरोपी की दलील को घृणित करार देते हुए उस पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया है.

Written By Satyam Kumar | Published : August 30, 2025 8:46 PM IST

हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी एक व्यक्ति की इस दलील को घृणित करार दिया कि उसके खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा रद्द करना नाबालिग पीड़िता के हित में होगा, जिसे अन्यथा कलंक का सामना करना पड़ेगा. जस्टिस गिरीश कठपालिया ने 29 अगस्त को पारित फैसले में कहा कि कलंक गलत कृत्य की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले पर लगना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया.

फैसले में जस्टिस कठपालिया ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील की दलील है कि वर्तमान कार्यवाही को रद्द करना अभियोक्ता के हित में होगा, अन्यथा उसे कलंक का सामना करना पड़ेगा. मैं इस दलील को घृणित मानता हूं. जस्टिस ने कहा कि कलंक गलत कृत्य की शिकार पीड़िता पर नहीं, बल्कि गलत काम करने वाले अपराधी पर लगना चाहिए। समाज की मानसिकता में आमूल-चूल बदलाव लाना होगा। कलंक बलात्कार जैसी भयावह पीड़ा झेलने वाली लड़की पर नहीं, बल्कि अपराधी पर लगाना होगा.

Advertisement

दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार की कार्यवाही रद्द करने से इनकार करते हुए उसे दिल्ली हाई कोर्ट विधिक सेवा समिति के पास 10,000 रुपये जमा कराने का निर्देश दिया. अदालत ने आरोपी के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि पीड़िता के माता-पिता ने उसके साथ मामला सुलझा लिया है.

Also Read

More News

जस्टिस ने कहा कि यह दलील भी पूरी तरह से बेबुनियाद है, क्योंकि याचिकाकर्ता (आरोपी) के कथित कृत्य के कारण नाबालिग लड़की के साथ अन्याय हुआ है और उसे कष्ट झेलना पड़ा है, न कि उसके माता-पिता को. जस्टिस कठपालिया ने आगे कहा कि केवल अभियोजन पक्ष ही आरोपी को माफ कर सकता है, वह भी कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में. जैसा कि ऊपर जिक्र किया गया है, अभियोजन पक्ष अब भी नाबालिग लड़की है. बताते चलें कि साल 2024 में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, आरोपी ने लड़की का अश्लील वीडियो बनाकर उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. मामले में उस पर यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं.

Advertisement