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लड़की का पीछा करने पर हो सकती है 3 साल तक की सजा,जा​निए क्या कहता है कानून

निर्भया केस के बाद कानून में सख्त बदलाव किए गए है. आईपीसी की धाराओं में संशोधन करते हुए अब छेड़छाड़ और पीछा करने जैसे कृत्यों के लिए विस्तार से व्याख्या की गयी है और कानून में बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं.

Written By Nizam Kantaliya | Published : December 8, 2022 4:47 AM IST

नई दिल्ली, गर्ल्स का पीछा करना, गर्ल्स के साथ जबरदस्ती दोस्ती करने की कोशिश करना, कॉलेज या ऑफिस जाते समय उन पर टिप्पणी करना ये सारे ही तरीके बॉलीवुड की फिल्मों में प्यार के इजहार के लिए अपनाए जाते रहे हैं. लेकिन अब हमारे देश के कानून की नज़र में ये सभी एक अपराध की तरह है.

अपराधिक मानसिकता

अक्सर हमे ये देखने को मिलता है कि युवतियों के पीछे लफंगे लग जाते हैं तथा उनका स्कूल कॉलेज तक जाना दूभर कर देते हैं.स्कूल कॉलेज की बस से लेकर घर तक उनका पीछा करते हैं और यही नहीं आज इंटरनेट के युग में ऐसे आपराधिक कुकर्मी मानसिकता के लोग ईमेल या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक संरचना का प्रयोग करते हुए बार-बार किसी गर्ल्स को मानीटर करते हैं और बार बार संपर्क साधने का प्रयास करते हैं.

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इस तरह के मामलों में पहले अधिक सख्त कानूनी प्रावधान नहीं थे जिसके चलते लड़की हो या महिला पुलिस में शिकायत करने से भी डरती थी, क्योंकि ऐसे लफंगे फिर से उन्हे बार बार परेशान करते थे जिससे उनका जीना दूभर हो जाता था. यहां तक कि इसके चलते उनकी पढाई तक छूट जाती थी.

निर्भया केस के बाद सख्त प्रावधान

लेकिन अब ऐसा नहीं हैं, निर्भया केस के बाद कानून में सख्त बदलाव किए गए है. आईपीसी की धाराओं में संशोधन करते हुए अब छेड़छाड़ और पीछा करने जैसे कृत्यों के लिए विस्तार से व्याख्या की गयी है और कानून में बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं. 2013 में जब कानून में संशोधन हुआ है उसके बाद के मामलों में छेड़छाड़ के लिए नए कानून के तहत सजा का प्रावधान है.

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नए कानून के अनुसार इस तरह के मामले अब आईपीसी की धारा 354 डी के तहत दर्ज किए जाएंगे. गर्ल्स का पीछा करना और बार-बार उससे संपर्क करने का प्रयास करना एक संज्ञेय और गैर जमानती दंडनीय अपराध है.इस प्रकार के अपराध में पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष की सजा और दूसरी बार 5 वर्ष तक की सजा और जुर्माना दोनो का प्रावधान है.

ये अदालत पर निर्भर करता है कि वो इस तरह के मामलों पर दोषी के खिलाफ किस तरह का जुर्माना तय करता है. गौरतलब है कि छेड़छाड़ के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौर को भी 6 महीने जेल की सजा सुनाई थी.

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