खरीदा प्रोडक्ट निकला है खराब तो आप को मिल सकते है हजारों रूपए का मुआवजा
नई दिल्ली, ई कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते साम्राज्य के बीच दुनियाभर में ग्राहकों को खराब उत्पाद मिलने की शिकायतों में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है. मार्च 2022 में लोकल सर्किल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार हमारे देश में प्रत्येक 2 में 1 उपभोक्ता ने अधिक उच्च-मूल्य वाले खराब उत्पाद खरीदने की बात स्वीकारी है. हाल ही कई ऐसे मौके आए है जब खराब उत्पादों की डिलीवरी होने पर इसे ई कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हुआ है.
उपभोक्ता का अधिकार
कोविड के बाद मजबूत होते आर्थिक स्थिति से लोगों के बीच ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से महंगे कीमतों वाले सामान खरीदने का चलन बढ़ा है. ऐसे में उनका खराब उत्पादों से सामना भी बढ़ गया है. इसके अलावा ऐसे मामलों के निपटारे के लिए उचित तंत्र की जानकारी नहीं होना एक बड़ी मुश्किल है.
अगर कोई दुकानदार, सप्लायर या कंपनी आपको खराब सामान या सर्विस देती है, तो उसको फौरन दुरुस्त करना होगा या फिर बदलकर देना होगा. इसके अलावा अगर आपने ऑनलाइन.कोई उत्पाद नकली या फिर खराब मिलता है तो आपको उपभोक्ता फोरम में इसकी शिकायत करनी चाहिए, ऐसे में आप मुआवजे के हकदार हैं.
आज हम आपको बता रहे है कि आपके द्वारा खरीदी गई खराब सेवा हो या प्रोडक्ट उसे लेकर आप किस तरह से शिकायत कर सकते है और ना केवल आपके खर्च हुए पैसे को वापस पा सकते है बल्कि आपको खराब प्रोडक्ट मिलने से हुई परेशानी के लिए मुआवजा भी हासिल कर सकते है.
कौन और किसके खिलाफ कर सकते है शिकायत
कोई भी व्यक्ति या संस्था जिसने कही से भी कोई सेवा या उत्पाद खरीदा है उसके बदले में उसने नियत राशि अदा की है और बिल प्राप्त किया है. ऐसी स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति एक उपभोक्ता के रूप में उपभोक्ता अदालत या फोरम में शिकायत/केस दर्ज करा सकता है. कोई भी रजिस्टर्ड संस्था सार्वजनिक रूप से बिकने वाली सामग्री को लेकर भी उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कर सकती हैं.
उपभोक्ता ने 5—10 रुपये की खरीद से लेकर करोड़ रुपये की सामग्री या सेवा क्यों नहीं खरीदी हो, अगर उसे मिली सेवा या सामग्री खराब या उचित नहीं है तो उपभोक्ता किसी भी व्यापारी, कंपनी, सेवा प्रदाता कंपनी से लेकर अस्पताल तक के खिलाफ केस दर्ज कर सकते हैं. यहां तक की उपभोक्ता किसी व्यक्ति विशेष से कोई खरीद करते है तो व्यक्ति के खिलाफ भी मामला दर्ज करा सकते है लेकिन ऐसे मामलों में आपको खरीद का ओरिजिनल बिल रखना होगा.
जिला, राज्य और राष्ट्रीय मंच
उपभोक्ताओं के लिए इस तरह के मामलों के निस्तारण के लिए जिले से लेकर राष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ता मंच या अदालत मौजूद है. ये सभी केन्द्र सरकार के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा संचालित किए जाते है.
सरकार के मंत्रालय द्वारा उपभोक्ताओं के लिए गठित किए इन मंच या अदालतों में शिकायतों की सुनवाई न्यायिक अधिकारियों से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज करते है.
खरीदा हुआ प्रोडक्ट अगर 20 लाख रुपये तक की कीमत का है, तो इसकी शिकायत जिला उपभोक्ता अदालत/मंच पर कर सकते है. 20 लाख से अधिक और 1 करोड़ तक का प्रोडक्ट होने पर राज्य आयोग में होगी शिकायत दर्ज.अगर खरीदे गए सामान या सर्विस की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा है, तो फिर आप सीधे नेशनल कंज्यूमर कमीशन जा सकते हैं.
सादे कागज पर करें शिकायत
इन उपभोक्ता अदालतों में आम व्यक्ति अपनी शिकायत एक सादे कागज पर लिखकर ही कर सकता है. हां ये जरूर है कि शिकायत में आपको खरीदी गई सामग्री का पूरा ब्योरा देना होगा. खरीद की घटना कहां, कब, कितनी राशि, खराब उत्पाद की स्थिति सभी बातों का शिकायत में वर्णन करना होगा.
शिकायत के लिए सबसे खास बात है उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई सामग्री का बिल या अन्य दस्तावेज संलग्न करना जरूरी है. साथ ही उत्पाद के बदले में सामने वाली कंपनी से कितनी राहत, मुआवजा आप चाहते है इसका वर्णन करना होगा.
कैसे होती है सुनवाई
उपभोक्ता द्वारा दी गयी शिकायत पर सबसे पहले उपभोक्ता अदालतें या मंच शिकायत और उसके साथ संलग्न दस्तावेज पर सुनवाई करती है. शिकायत सही पाए जाने पर उपभोक्ता मंच सामने वाली कंपनी या पक्षकार को नोटिस जारी करता है.
कई बार सामने वाली कंपनी इसका जवाब नहीं देती तो अदालत उन्हे तीन—चार बार नोटिस देने के बाद एकपक्षीय फैसला सुना सकती है.
कई मामलों में सामने वाली कंपनी अपना जवाब पेश करती है. शिकायत और जवाब पर सुनवाई के बाद उपभोक्ता मंच उस पर अपना फैसला सुनाते है.
उपभोक्ता की शिकायत सही होने की स्थिति में खरीदे गए उत्पाद की कीमत या उसके समान दूसरा उत्पाद देने का आदेश दिया जा सकता है. साथ ही शिकायत करने और खराब उत्पाद मिलने की वजह से उपभोक्ता को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अदालत कंपनी पर जुर्माना भी लगाती है जिसे उपभोक्ता को दिया जाता है.
उपभोक्ताओं के हक में…
देशभर में ऐसे कई मामले है जब देशभर के उपभोक्ता अदालतों ने सर्विस या उत्पाद में खराबी पर लाखों नही बल्कि करोड़ों रुपए का जुर्माना लगाया है.
23 नवंबर 2022 को बेंगलुरु की उपभोक्ता अदालत ने उपभोक्ता से कैरी बैग के 25 रु.वसूलने पर रिलायंस पर 7 हजार का जुर्माना लगाया था.
31 अगस्त 2022 को उत्तर प्रदेश उपभोक्ता आयोग ने इलाज में लापरवाही बरतने के एक मामले में गोमती नगर सहारा अस्पताल को पीड़ितों को 86 लाख 97 हजार रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए थे.
राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने जनवरी 2017 में चिकित्सकीय इलाज में लापरवाही से हुई युवक की मौत मामले में संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल व डॉ. अनुराग गोविल पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था.
इसी तरह से अप्रेल 2016 में दिल्ली के एस्कॉर्ट्स हार्ट अस्पताल पर 1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था.