पत्नी की पढ़ाई छुड़ाना
हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक विवाह को समाप्त करते हुए कहा कि पत्नी को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर करना उसके सपनों को नष्ट करने के बराबर है.
Written By Satyam Kumar Published : March 9, 2025 4:08 PM IST
हाल ही में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक विवाह को समाप्त करते हुए कहा कि पत्नी को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर करना उसके सपनों को नष्ट करने के बराबर है.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट
फैसले में फैमिली कोर्ट ने महिला की पति से अलग होने की याचिका को अस्वीकार कर दिया था.
हाई कोर्ट ने महिला की अपील को स्वीकार कर हिंदू विवाह अधिनियम के प्रावधानों के तहत विवाह को समाप्त कर दिया. आइये जानते हैं कि हाई कोर्ट ने ऐसा करने के वजह को लेकर क्या-क्या बताया है.
हाई कोर्ट ने वस्तुस्थिति को ध्यान में रखकर कहा कि उसे (पत्नी) को एक ऐसे व्यक्ति के साथ रहने के लिए मजबूर करना जो न तो शिक्षित है और न ही अपने आप को सुधारने के लिए इच्छुक है, मानसिक क्रूरता के समान है.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जजमेंट में अमेरिकी दार्शनिक जॉन ड्यूई के प्रसिद्ध क्वोट 'शिक्षा केवल जीवन के लिए तैयारी नहीं है, बल्कि यह स्वयं जीवन है' का उल्लेख किया है.
महिला ने अदालत में बताया कि उसने 2015 में शाजापुर के एक व्यक्ति से विवाह हुआ था, जब उसने कक्षा 12 की परीक्षा पास की थी.
विवाह के बाद, वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थी, लेकिन उसके ससुराल वालों ने इसके खिलाफ थे.
विवाह के कुछ ही दिनों बाद, महिला अपने माता-पिता के घर लौट आई और फिर तलाक के लिए पारिवारिक न्यायालय में याचिका दायर की, जिसे अस्वीकार कर दिया गया.
अदालत ने यह भी कहा कि 2015 में विवाह के बाद से, याचिकाकर्ता और प्रतिवादी केवल जुलाई 2016 में तीन दिन एक साथ रहे. उस तीन दिन का अनुभव महिला के लिए एक बुरे सपने जैसा था
और उसके बाद वे कभी एक साथ नहीं रहे. यह तथ्य इस बात को स्पष्ट करता है कि विवाह में किसी तरह की पुनर्मिलन की संभावना नहीं है. कहकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने विवाह रद्द कर दिया.