मुस्लिम महिलाओं को पति से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

Satyam Kumar

Image Credit: my-lord.in | 10 Jul, 2024

बुधवार के दिन सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं अपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत अपने पति से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार रखती है.

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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम व्यक्ति की याचिका खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया है.

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व्यक्ति ने तेलंगाना हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसने अपनी पूर्व पत्नी को ₹10,000 अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया था.

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कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश उन याचिकाकर्ताओं में से एक हैं, जिन्होंने संविधान के अनुच्छेद 110 के तहत धन विधेयक के रूप में 2016 के आधार अधिनियम को पारित करने को चुनौती दी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम इस प्रमुख निष्कर्ष के साथ आपराधिक अपील को खारिज कर रहे हैं कि धारा 125 सीआरपीसी सभी महिलाओं पर लागू होगी, न कि केवल विवाहित महिलाओं पर.

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अदालत ने ये बताया कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता लंबित रहने के दौरान मुस्लिम महिला तलाक लेती है तो मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के अनुसार भी गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है.

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सुनवाई के दौरान शाह बानो मामले का जिक्र भी आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि सीआरपीसी की धारा 125 एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है जो मुस्लिम महिलाओं पर भी समान रूप से लागू होता है.

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अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उपरोक्त टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है जिसके तहत मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता के तहत 10,000 रूपये देने होंगे.

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