पांचवा, देश भर पॉक्सो अदालत बनाने और समय पर बाल यौन उत्पीड़नों की सुनवाई को लेकर जस्टिस बेला एम त्रिवेदी ने अहम फैसला सुनाया है.
Image Credit: my-lord.inबेला एम त्रिवेदी के पिता न्यायिक सेवा में थे. सेवा के दौरान लगातार ट्रांसफर हुए, जिसके चलते उनकी शिक्षा विभिन्न स्कूलों में हुई है.
Image Credit: my-lord.inएमएस यूनिवर्सिटी, वडोदरा से बीकॉम-एलएलबी किया.
Image Credit: my-lord.inहालांकि, जस्टिस त्रिवेदी ने अपने 85 पन्नों के असहमति वाले फैसले में कहा कि केवल संसद ही किसी जाति को एससी सूची में शामिल कर सकती है या उसे बाहर कर सकती है, और राज्यों को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.
Image Credit: my-lord.in10 जुलाई 1995 को सीधे अहमदाबाद में सिटी सिविल और सेशन कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया.
Image Credit: my-lord.inयह एक सुखद संयोग रहा कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी तब उनके पिता पहले से ही सिटी सिविल और सेशन कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे.
Image Credit: my-lord.inलिम्का बुक ऑफ इंडियन रिकॉर्ड्स ने अपने 1996 संस्करण में यह प्रविष्टि दर्ज की है कि “पिता-पुत्री एक ही अदालत में जज हैं.
Image Credit: my-lord.in17 फरवरी 2011 को गुजरात HC के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया.
Image Credit: my-lord.inराजस्थान HC में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उन्होंने जून 2011 से जयपुर बेंच में काम किया.
Image Credit: my-lord.inचौथा पंजाब राज्य बनाम दविंदर सिंह, सात जजों की संविधान पीठ, जिसमें जस्टिस बेला त्रिवेदी शामिल थीं, ने अगस्त 2024 में 6:1 के बहुमत से माना कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है.
Image Credit: my-lord.in31 अगस्त, 2021 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत नहीं किया गया.
Image Credit: my-lord.inसुप्रीम कोर्ट जस्टिस बेला एम त्रिवेदी 09 जून, 2025 को सेवानिवृत्त होंगी.
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