धर्म परिवर्तन मामले में इलाहाबाद HC को Article 25 का जिक्र क्यों करना पड़ा?

Satyam Kumar

Image Credit: my-lord.in | 02 Jul, 2024

पंकज मिथल के पिता जस्टिस नरेंद्र नाथ मिथल इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रहें. उनका कार्यकाल साल 1978 से 1992 तक रहा.

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बहुसंख्यक आबादी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इंकार करते हुए कहा कि अगर इन आयोजनों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो देश की बहुसंख्यक आबादी एक दिन माइनॉरिटी बन जाएगी.

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संविधान आर्टिकल 25

अदालत ने इस दौरान संविधान का अनुच्छेद 25 का जिक्र भी किया है.

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अंत: करण की स्वतंत्रता

अदालत ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है,

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धर्म परिवर्तन

लेकिन यह एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन का प्रावधान नहीं करता है.

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धर्म सभा

बता दें कि मामला में यूपी के हमीरपुर जिले की है, जहां शिकायतकर्ता के भाई को धर्म सभा में ले जाया गया, जहां पर उसका धर्म परिवर्तन कर दिया गया.

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जमानत खारिज

अदालत ने सुनवाई के दौरान उक्त टिप्पणी की. साथ ही आरोपी की जमानत की मांग को खारिज किया.

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